पोषण से भरपूर शुष्क एवं अर्धशुष्क क्षेत्रीय फल

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लेखक

  • अरविंद कुमार सिंह केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र (भाकृअनुप-सीआईएएच) गोधरा-वडोदरा राजमार्ग, वेजलपुर-389340, गोधरा, पंचमहल, गुजरात
  • डी एस मिश्रा केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र (भाकृअनुप-सीआईएएच) गोधरा-वडोदरा राजमार्ग, वेजलपुर-389340, गोधरा, पंचमहल, गुजरात
  • जगदीश राणे केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र (भाकृअनुप-सीआईएएच) गोधरा-वडोदरा राजमार्ग, वेजलपुर-389340, गोधरा, पंचमहल, गुजरात
  • आनंद साहिल केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र (भाकृअनुप-सीआईएएच) गोधरा-वडोदरा राजमार्ग, वेजलपुर-389340, गोधरा, पंचमहल, गुजरात

सार

भारतीय शुष्क एवं अर्धशुष्क क्षेत्र, देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का एक महत्वपूर्ण भाग है। इसमें मुख्यतः राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश इत्यादि क्षेत्र शामिल हैं। ये क्षेत्र अत्यंत कठोर एवं विषम जलवायु परिस्थितियों के लिए जाने जाते हैं। यहाँ वार्षिक वर्षा केवल 100 से 500 मि.मी. के बीच होती है तथा वर्षा का वितरण अत्यंत अनियमित रहता है। वर्षा की परिवर्तनशीलता का गुणांक 40 से 70 प्रतिशत तक पाया जाता है, जिससे कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र में तापमान 1 से 48 से. तक पहुँच जाता है, तेज हवाएँ चलती हैं तथा मृदा प्रायः रेतीली, कंकरीली, पथरीली प्रकृति की होती हैं। इन मृदा की जल धरण क्षमता अत्यंत कम होती है तथा इनमें जैविक पदार्थ एवं पोषक तत्वों की कमी पाई जाती है। कई स्थानों पर मिट्टी अत्यधिक गहरी अथवा उथली होती है, जिससे पौधें की वृद्धि प्रभावित होती है। इसके साथ ही भूमिगत जल प्रायः गहरे स्तर पर उपलब्ध होता है। ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में केवल वे ही फल फसलें सफलतापूर्वक विकसित हो सकती हैं, जो कम पानी, अधिक तापमान एवं लवणीय परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता रखती हैं।

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प्रकाशित

2026-07-16