अल्प दोहित सब्जियां एवं आनुवंशिक संसाधन विविधता

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लेखक

  • राजेश कुमार भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी-221305
  • राकेश कुमार दुबे भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी-221305

सार

भारत, जैव विविधता की दृष्टि से विश्व के समृद्ध देशों में शामिल है। विविध जलवायु क्षेत्रों और पारंपरिक कृषि प्रणालियों के कारण यहाँ अनेक देसी एवं अल्पदोहित सब्जियाँ पाई जाती हैं। ये सब्जियाँ पोषण, औषधीय गुण, जलवायु अनुकूलता तथा किसानों की आय वृद्धि की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सीमित उपयोग, कम जागरूकता और बाजार की कमी के कारण अभी व्यापक स्तर पर लोकप्रिय नहीं हो सकी हैं। अल्पदोहित सब्जियों में कुपोषण दूर करने की अपार क्षमता है। इनमें से कई फसलें बदलती जलवायु के अनुकूल हैं तथा कमजोर भूमि में भी कम प्रबंधन के साथ सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं। उपभोक्ताओं में बढ़ती जागरूकता के साथ इनकी मांग भी बढ़ रही है, इसलिए इनके उत्पादन को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिए किसानों, उपभोक्ताओं, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं सहित सभी हितधरकों के समन्वित प्रयासों से अनुसंधन एवं विकास की स्पष्ट रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि इनके आनुवंशिक जननद्रव्यों का संग्रह, संरक्षण और उन्नत किस्मों का विकास सुनिश्चित किया जा सके।

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प्रकाशित

2026-07-16