लीची में पोषण प्रबन्धन
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लीची एक स्वादिष्ट पफल है, जो अपने आकर्षक रंग के कारण ‘पफलों की रानी’ के रूप में जाना जाता है। लीची के पफलों में 60 प्रतिशत रस, 8 प्रतिशत गूदा, 19 प्रतिशत बीज तथा 13 प्रतिशत छिलका होता है। इसके साथ ही यह चिकित्सीय और औषधीय गुणों का भी समृद्ध स्रोत है। इसके पफलों की घरेलू एवं अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में कापफी मांग है। व्यावसायिक बागवानी द्वारा किसान तथा नौजवान लीची से अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। भारतवर्ष में लीची की व्यावसायिक बागवानी मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, असोम आदि राज्यों में की जाती है। पिछले कुछ वर्षों में लीची के क्षेत्रापफल तथा उत्पादन में आशातीत बृद्धि हुई है।
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