कटहल की उन्नत खेती

52 / 46

लेखक

  • उपेन्द्र यादव शोध छात्र, फल विज्ञान विभाग, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर (उत्तर प्रदेश)
  • विवेक कुमार त्रिपाठी अधिष्ठाता, उद्यान महाविद्यालय एवं विभागाध्यक्ष, फल विज्ञान, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर (उत्तर प्रदेश)
  • स्वरूप मणि शोध छात्र, फल विज्ञान विभाग, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर (उत्तर प्रदेश)

सार

कटहल एक महत्वपूर्ण फलदार वृक्ष है, जिसे गर्म और आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में व्यापक रूप से उगाया जाता है। यह स्वादिष्ट, सुगंधित और पोषक तत्वों से भरपूर फल है। भारत में इसे पारंपरिक रूप से घरों के आंगन, बगीचों और खेतों की मेड़ों पर लगाया जाता रहा है। इसे "गरीबों का फल" भी कहा जाता है, क्योंकि यह सस्ता, सुलभ और बहुउपयोगी होता है। इसके कोमल फलों का उपयोग सब्जी के रूप में तथा पके फलों का सेवन ताजे फल, जूस, जैम और अचार के रूप में किया जाता है। कटहल, विश्व का सबसे बड़ा फल माना जाता है। इसे बंगाली में कंथाल, तमिल में पला, अंग्रेजी में जैकफ्रूट, गुजराती में फणस और मलयालम में चक्का कहा जाता है। यह उष्णकटिबंधीय फल मोरेसी कुल से संबंधित है। इसका जीनोम चतुर्गुणित (2n = 4॰  = 56) माना जाता है और इसकी उत्पत्ति भारत के पश्चिमी घाट के वर्षा वनों से मानी जाती है।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2026-09-25