बागवानी आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली से लाभ वृद्धि

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लेखक

  • नूपुर शर्मा विषयवस्तु विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, सवाईमाधोपुर, कृषि विश्वविद्यालय,कोटा
  • बी. एल. मीणा वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, सवाईमाधोपुर, कृषि विश्वविद्यालय,कोटा
  • बी. एल. ढाका प्राध्यापक, प्रसार शिक्षा, कृषि विज्ञान केंद्र, सवाईमाधोपुर, कृषि विश्वविद्यालय,कोटा
  • जगदीश प्रसाद तेतरवाल प्राध्यापक, सस्य विज्ञान, कृषि विज्ञान केंद्र, सवाईमाधोपुर, कृषि विश्वविद्यालय,कोटा
  • वर्षा गुप्ता सस्य विज्ञान, कृषि विज्ञान केंद्र, सवाईमाधोपुर, कृषि विश्वविद्यालय,कोटा

सार

राजस्थान का सवाई माधेपुर जिला कृषि-जलवायु क्षेत्र 3-बी में स्थित है और लगभग 15,000 हैक्टर क्षेत्रा में अमरूद की खेती  होने के कारण "अमरूद की नगरी" के नाम से प्रसिद्ध  है। इसी जिले के प्रगतिशील किसान श्री देवराज सिंह राजावत ने 8 हैक्टर क्षेत्र में बागवानी-आधरित एकीकृत कृषि प्रणाली का सफल माॅडल विकसित किया है। इस माॅडल में 3 हैक्टर में अमरूद, 2 हैक्टर में आंवला, 2 हैक्टर में प्रमुख  फसलें तथा 0.5-0.5 हैक्टर में सब्जियाँ एवं हरा चारा उगाया जाता है। इसके साथ डेयरी, वर्मीकम्पोस्ट, जैविक उर्वरकों का उपयोग, वर्षाजल संरक्षण, सूक्ष्म तथा सौर ऊर्जा आधरित सिंचाई को समन्वित रूप से अपनाया गया है। इस प्रणाली से उत्पादन लागत और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हुई, जबकि पफसल विविधिकरण, रोग प्रबंधन तथा संसाधनों के उपयोग में सुधार हुआ। वर्ष 2018-2025 के दौरान अमरूद बाग से लगभग 2.25 लाख रुपये की लागत पर 5 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हुआ। वर्तमान में यह माॅडल प्रतिवर्ष 8-9 लाख रुपये की शुद्ध आय देकर सतत एवं लाभकारी कृषि का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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प्रकाशित

2026-09-25