लहसुन प्रसंस्करण की बढ़ती महत्ता
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वर्तमान में भारत में प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों की मांग निरंतर बढ़ती जा रही है। हमारे देश में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से जहाँ मात्रा 13 प्रतिशत आय होती है, वहीं चीन में यह 25 प्रतिशत है। दूसरी ओर पफल-सब्जी उत्पादन में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है, लेकिन प्रसंस्करण में कापफी पीछे है। देश में कटाई उपरांत प्रसंस्करण तकनीकियों एवं उचित साध्नों को न अपनाने के कारण 25-30 प्रतिशत तक पफल व सब्जियों का नुकसान हो रहा है। इससे बचने के लिए किसान स्वयं सहायता समूह अथवा सहकारी स्तर पर पफल-सब्जियों का प्रसंस्करण तथा विपणन करें तो इस नुकसान को कम करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी हो सकती है। इस क्षेत्रा में कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली भी अहम् भूमिका निभा रहा है। यह केंद्र पफल-सब्जी के प्रसंस्करण में व्यावसायिक प्रशिक्षण आयोजित कर किसानों, युवकों, युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के निरंतर अवसर प्रदान कर रहा
है। यदि ग्रामीण वर्ग को खाद्य प्रसंस्करण की सही जानकारी एवं प्रसंकरण इकाइयां लगाने का विस्तृत ज्ञान होगा तो कृषि उत्पादों का मूल्यसंवधर््न और आय के नए स्रोत बनेंगे परिणामतः आर्थिक स्तर में सुधर होगा। इसी के साथ पौष्टिक पफल व सब्जियों का वर्ष भर सेवन संभव होगा।
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