मृदा पोषक तत्व सूचकांक का महत्व

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लेखक

  • तरुण अदक भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, डाकघर-काकोरी, लखनऊ, उ.प्र. (भारत)
  • दुष्यंत मिश्रा भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, डाकघर-काकोरी, लखनऊ, उ.प्र. (भारत)
  • विनोद कुमार सिंह भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, डाकघर-काकोरी, लखनऊ, उ.प्र. (भारत)

सार

वर्तमान स्थिति और भविष्य में कुशलतापूर्वक क्या और किस प्रकार कार्यों को किया जाना चाहिए, इसको जानने के लिए किसी भी उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्रा के लिए मजबूत प्रदर्शन संकेतक का होना आवश्यक है। इस दिशा में किसानों के बागों का सूचीबद्ध होना जरूरी है। बागवानी से अर्जित लाभ किसान परिवार की आजीविका का मुख्य स्रोत होता है। इसलिए निश्चित अन्तराल पर मिट्टी के पोषक तत्वों के विश्लेषण के आधर पर किसानों के बागों का सूचकांक होना अनिवार्य है। फल उत्पादकता कई कारकों से कम हो सकती है जिनमें मिट्टी में पोषक तत्व, पानी का कुप्रबंधन, अनुत्पादक बाग, मौसम की परिवर्तनशीलता प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इस स्थिति में बागों की मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा में कमी की पहचान करने और बागों की विविधता के लिए मृदा पोषक तत्व सूचकांक की एक नई अवधरणा विकसित की गई।

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प्रकाशित

2023-04-17