मार्च-अप्रैल में बागों की देखभाल
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ऋतुएँ हमें यह स्मरण करवाती हैं कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है जोकि प्रगति का प्रतीक है। भारत में मुख्य रूप से छह ऋतुएँ होती हैं जिनमें से प्रत्येक की अवधि दो माह की होती है। वसंत ऋतु की अवधि मार्च (चैत्रा) से अप्रैल (बैसाख) तक होती है। वसंत का अपना भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस ऋतु में प्रकृति में स्वतःस्पफूर्त नवचेतना का संचार होने लगता है। नव कोंपलों के प्रस्पफुटन के साथ ही यह प्रतीत होता है कि मानो प्रकृति नवसृजन हेतु स्वयं का शृंगार कर रही हो। फलस्वरूप पेड़-पौधें के साथ मनुष्य व पशु-पक्षी भी विभोर हो इस वसंत ऋतु रूपी उत्सव का आनंद उठाते हैं। परंतु उत्सव मनाने के साथ हमें अपने बाग-बगीचों का ध्यान भी रखना है। वैज्ञानिकों के अनुसार एल-नीनो घटना के कारण वर्ष 2023 सर्वाधिक गर्म वर्षों में से एक हो सकता है जिसमें पृथ्वी के वातावरण में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि भी हो सकती है। अतः बागानों की देऽभाल के लिए पहले से भी अध्कि सजग
रहने की आवश्यकता है। इस अवधि में फल वृक्षों में वानस्पतिक वृद्धि एवं पुष्पण की प्रक्रिया तेजी से होती है। परिणामस्वरूप, बागों में की जाने वाली कृषि क्रियाओं की हलचल भी बढ़ जाती है।
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