नवम्बर-दिसम्बर में बागवानी कार्यकलाप

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लेखक

  • हरे कृष्ण भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधन संस्थान, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • अरविंद कुमार सिंह भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधन संस्थान, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • रामकेश मीणा भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधन संस्थान, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • पुष्पेंद्र प्रताप सिंह भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधन संस्थान, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

सार

हेमन्त का आगमन होते ही पेड़ों से पत्ते झड़ने लगते हैं। पुराने पत्ते पीले होकर पेड़ों से गिरते हैं, ताकि नये पत्ते उनकी जगह ले सकें। नव-निर्माण का सन्देश देने वाली यह ऋतू प्राकृतिक एवं उद्यानिकी दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है। इस ऋतू के आरंभ के साथ ही उद्यान में किए जाने वाले कृषि-कलापों का महत्व भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस अवधि के दौरान जहां अमरूद, आंवला और नीबूवर्गीय पफलों के विपणन की व्यवस्था करनी होती है, वहीं बागों में खाद-उर्वरण, निराई-गुड़ाई तथा काट-छांट की भी तैयारी करनी होती है।

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प्रकाशित

2022-11-16