केला एक, व्यंजन अनेक

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लेखक

  • दिनेश कुमार अग्रवाल भाकृअनुप-राष्ट्रीय केला अनुसंधन केंद्र, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु
  • अर्जुन सिंह भाकृअनुप-राष्ट्रीय केला अनुसंधन केंद्र, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु
  • पी. सुरेश कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय केला अनुसंधन केंद्र, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु
  • डी. अमेलिया केरन भाकृअनुप-राष्ट्रीय केला अनुसंधन केंद्र, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु
  • एस. उमा भाकृअनुप-राष्ट्रीय केला अनुसंधन केंद्र, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु

सार

औषधीय एवं सगंधीय पौधे मानव सभ्यता से जुड़े रहे हैं और भविष्य के लिए मूल्यवान ध्रोहर हैं। अनेक कारणों से इन पौधें को वर्तमान में उपयोग करते हुए भविष्य के लिए
सुरक्षित रखना भी अत्यंत आवश्यक है। भारत के रेड डाटा बुक में 427 संकटग्रस्त पौधों के नाम दर्ज हैं। समय रहते इन औषधीय महत्व का संरक्षण करना जरूरी है अन्यथा
भविष्य में इनका अस्तिव भी समाप्त हो सकता है। इतना ही नहीं इस कारणवश आने वाले समय में इनका लाभ नहीं मिल सकेगा। ऐसे ही एक पौधे गुग्गल के बारे में यहां
संरक्षित जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है।

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प्रकाशित

2022-11-16