बीजीय धनिया का उन्नत उत्पादन

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लेखक

  • गिरधरी लाल कुमावत अखिल भारतीय समन्वित मसाला अनुसंधन परियोजना, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि महाविद्यालय, जोबनेर, जयपुर (राजस्थान)
  • अमर चन्द शिवरान अखिल भारतीय समन्वित मसाला अनुसंधन परियोजना, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि महाविद्यालय, जोबनेर, जयपुर (राजस्थान)
  • एस. एस. पूनियां अखिल भारतीय समन्वित मसाला अनुसंधन परियोजना, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि महाविद्यालय, जोबनेर, जयपुर (राजस्थान)

सार

बीजीय मसालों में ध्निया का प्रमुख स्थान है। यह दानों एवं पत्तियों दोनों के लिए ही उगाया जा सकता है। ध्निया का प्रयोग भोजन को सुगन्ध्ति व स्वादिष्ट बनाता है। इसकी पत्तियों में शर्करा, प्रोटीन व विटामिन ‘ए’ पाया जाता है। धनिया का औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। भारत में धनिया की प्रमुख रूप से राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश में की जाती है। राजस्थान में धनिया की खेती मुख्यतः कोटा, झालावाड़, बूंदी, सवाईमाधेपुर, बारां, अलवर, सीकर, जयपुर व चित्तौड़गढ़ में की जाती है।

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प्रकाशित

2022-11-16