गार्सिनिया का बढ़ता व्यावसायिक महत्व

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लेखक

  • पूजा बोहरा भाकृअनुप-केंद्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधन संस्थान, पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
  • अजित अरुण वामन भाकृअनुप-केंद्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधन संस्थान, पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

सार

गार्सिनिया क्लूसिएसी परिवार के महत्वपूर्ण वंशों में से एक है। इसके सदस्यों को औषधीय और स्वास्थ्यवर्धक  गुणों के लिए जाना जाता है। भारत को लगभग 37 गार्सिनिया प्रजातियों का घर माना जाता है। ये मुख्य रूप से तीन कृषि जैव विविध्ता वाले क्षेत्रों- पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी क्षेत्रा एवं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाई जाती हैं। व्यावसायिक तौर पर इनमें से किसी भी प्रजाति को पफलों की रानी-मैंगोस्टीन (गार्सिनिया मैंगोस्टाना) के समान लोकप्रियता नहीं मिली है। इसके बावजूद कुछ प्रजातियाँ क्षेत्राीय रूप से लोकप्रिय हैं। गार्सिनिया पारंपरिक रूप से स्थानीय आबादी द्वारा भोजन, दवाओं, लकड़ी, रंजक आदि से लेकर विविध् उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाती रही हैं। इस तरह की क्षेत्राीय लोकप्रिय प्रजातियों के प्रमुख उदाहरणों में तटवर्ती महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में पाया जाने वाला कोकम (गार्सिनिया इंडिका), केरल की मालाबार इमली (गार्सिनिया गम्मी-गट्टा) और उत्तर-पूर्वी भारत का कोवा मैंगोस्टीन (गार्सिनिया कोवा) शामिल हैं।

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प्रकाशित

2024-01-18