एस्पलियार प्रणाली से बढ़ाएं फलोत्पादन

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लेखक

  • आराधना कुमारी कृषि महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय, गंज-बासोदा, विदिशा, मध्य प्रदेश
  • संतोष कुमार सिंह डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार
  • पी. के. मिश्रा कृषि महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय, गंज-बासोदा, विदिशा, मध्य प्रदेश
  • विनोद कुमार गर्ग कृषि महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय, गंज-बासोदा, विदिशा, मध्य प्रदेश

सार

एस्पलियार प्रणाली पौधें के विकास के लिए उपयोगी तकनीक है। यह पौधें को सही सहारा और संरचना प्रदान करती है। यह पौधों के विकास को बढ़ावा देने में मदद करती है तथा फलों के उत्पादन में वृद्धि करती है। इस तकनीक में, पौधें के चारों ओर धगे लगाकर या ट्रेलिस, फेंस, दीवार या अन्य संरचनाओं से उन्हें सही सहारा दिया जाता है। इस प्रणाली को अक्सर अमरूद, सेब, नाशपाती, शरीफा और संतरे जैसे फलों को उगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक का उपयोग पौधें के उचित विकास और फलों के अध्कि उत्पादन के लिए किया जाता है।

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प्रकाशित

2024-01-18