पोषक तत्वों का खजाना है सिंघाड़ा
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सिंघाड़ा, एक जलीय फसल है। इसकी खेती कच्चे फल के रूप में की जाती है। इसे विशेषकर उष्णकटिबंध्ीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पानी में उगाया जा सकता है। झीलों, तालाबों और जिस जगह पर 3 फीट तक जलभराव हो, इसे आसानी से उगा सकते हैं। यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है एवं इसका सेवन विभिन्न प्रकार से किया जा सकता है। इसके आटे का व्रत-त्यौहारों में खुब उपयोग किया जाता है। इसके ताजे एवं हरे फलों के छिलके की स्वादिष्ट सब्जी भी बनाई जाती है। इसका उत्पादन देश के कई राज्यों जैसे-उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के तालाबों में किया जा रहा है। तालाबों की भुरभुरी मृदा एवं आद्र्रता की पर्याप्त मात्रा, सिंघाड़े की पैदावार के लिए काफी बेहतर होती है। अच्छी उपज के लिए मिट्टी क्षारीय एवं कार्बनिक पदार्थों से भरपूर होनी चाहिए। सिंघाड़े के पफल के सेवन से अस्थमा, मधुमेह एवं बवासीर के रोगियों को काफी फायदा मिलता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन्स और अन्य ऽनिज पदार्थ भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
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