राम करेले की पर्वतीय क्षेत्रों में खेती

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लेखक

  • रेनू सनवाल भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधन संस्थान, अल्मोड़ा
  • राहुल देव भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधन संस्थान, अल्मोड़ा
  • जयदीप कुमार बिष्ट भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधन संस्थान, अल्मोड़ा
  • लक्ष्मीकान्त भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधन संस्थान, अल्मोड़ा

सार

भारत में राम करेले को पहाड़ी करेला, मीठा करेला, अमेरिका में कैहुआ और अंग्रेजी में स्टफिंग कुकुम्बर या स्लिपर गोर्ड के नाम से जाना जाता है। यह कुकरबिटेस परिवार से संबंध्ति सब्जी है। इसका वानस्पतिक नाम साइक्लेन्थेरा पेडेटा है। इसके फल के अंदर का भाग खोखला होता है तथा जिसमें कई काले बीज होते हैं। इसका स्वाद व गंध् खीरे की तरह होती है। फलों के बीज निकालकर उसमें अन्य खाद्य पदार्थ, जैसे- चावल, पनीर, मछली आदि भरकर उन्हें पकाकर खाया जाता है। इसलिए इसे स्टपिफंग कुकुम्बर भी कहते है। इसकी युवा टहनियों और पत्तियों को साग के रूप में भी खाया जा सकता है। इस राम करेले की लगभग 30 प्रजातियां हैं, जो गर्म - समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय अमेरिका (एंडीज क्षेत्रा) से हैं।

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प्रकाशित

2024-01-18