पराली से बायोचार बनाकर बढ़ाएं आय
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बायोचार, पराली प्रबंधन, फसल अवशेष, पायरोलिसिस, मृदा स्वास्थ्य, मृदा कार्बनसार
फसल कटाई के बाद उत्पन्न पराली और अन्य अवशेषों का खुले में जलाना वायु प्रदूषण, कार्बन हानि तथा मृदा गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसी अवशेष को नियंत्रित, कम-ऑक्सीजन वाली अवस्था में पायरोलिसिस द्वारा बायोचार में बदला जा सकता है। बायोचार एक कार्बन-समृद्ध और छिद्रयुक्त पदार्थ है, जो उचित मात्रा एवं उपयुक्त मृदा परिस्थितियों में जल धारण, पोषक तत्व प्रतिधारण, मृदा कार्बन तथा कुछ स्थितियों में फसल उत्पादकता में सुधार में सहायक हो सकता है। यह लेख किसानों के लिए बायोचार की अवधारणा, स्थानीय स्तर पर अपेक्षाकृत सरल उत्पादन विधियों, सुरक्षा सावधानियों, कम्पोस्ट या जैविक खाद के साथ चार्जिंग, मात्रा निर्धारण और आर्थिक अवसरों को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। लेख इस बात पर जोर देता है कि बायोचार रासायनिक उर्वरकों का पूर्ण विकल्प नहीं है और इसका उपयोग मृदा परीक्षण, फसल की आवश्यकता तथा बायोचार की गुणवत्ता के आधार पर किया जाना चाहिए। इस प्रकार पराली को अपशिष्ट के बजाय कृषि संसाधन के रूप में देखा जा सकता है।
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