किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की एक पहल
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भारत में कृषि मानसून पर निर्भर करती है। ग्रामीण युवाओं द्वारा इसे बहुत लाभदायक व्यवसाय नहीं माना जाता है। युवाओं को खेती में बनाये रखना एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। इसी चिंता के दूर करने के लिए भारतीय कृषि कौशल परिषद के सहयोग से भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, पुणे (अटारी-जोन 8) द्वारा पिछले पांच वर्षो में कुल 241 कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम द्वारा 4936 किसानों और ग्रामीण युवाओं को आजीवका के लिए प्रशिक्षण दिया गया जिससे राज्य में कौशल प्रशिक्षण के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके। कृषि क्षेत्रा की परिणामी उत्पादकता बहुत कम है। भारतीय अर्थव्यवस्था के 8 से 9 प्रतिशत विकास दर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें कृषि क्षेत्रा में विकास दर 4 प्रतिशत सुनिश्चित करनी होगी, और कृषि में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाना होगा। हालांकि, कृषि विज्ञान केंद्र, ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें अधिक प्रभावी और मजबूत करने की आवश्यकता है। यह न केवल देश के ग्रामीण युवाओं को अपनी आजीविका बेहतर बनाने में सक्षम बनाएगा बल्कि कौशल विकास जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की सपफलता को भी सुनिश्चित करेगा।
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