कीटनाशकों के दुष्प्रभाव
595 / 55Abstract
वर्तमान में भारतीय जनसंख्या लगभग 1.39 बिलियन है और इसके वर्ष 2050 तक बढ़कर 1.64 बिलियन हो जाने का अनुमान है। खाद्यान्न का उत्पादन, वर्ष 1950-51 में लगभग 50 मिलियन टन था, जो कि वर्ष 2019-20 में बढ़कर 291.95 मिलियन टन हो गया है। वर्ष 2030 में लगभग 355 मिलियन टन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सालाना 6.4 प्रतिशत मिलियन टन अतिरिक्त उत्पादन की आवश्यकता होगी। यहां यह भी बताना प्रासंगिक होगा कि पफसल का नुकसान, विभिन्न कीटों, खरपतवारों, नेमाटोड और रोगों आदि के कारण हो रहा है। इन पफसल नुकसानों को शारीरिक, यांत्रिक, जैविक और रासायनिक तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है। इनमें से रासायनिक पफसल सुरक्षा उपाय (कीटनाशक) कृषि क्षेत्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डा. नाॅर्मन बोरलाॅग ने ठीक ही कहा था कि कृषि में उपयोग होने वाले कीटनाशक पर पूर्ण प्रतिबंध से वैश्विक खाद्य उत्पादन में 50 प्रतिशत की कमी हो सकती है और खाद्य कीमतों में 4-5 गुना बृद्धि हो सकती है। भारत में कीटनाशकों की प्रति व्यक्ति खपत 0.6 ग्राम/हैक्टर है। चीन (13.1 ग्राम/हैक्टर) और जापान (11.8 ग्राम/हैक्टर) जैसे अन्य देशों की तुलना में हम बहुत कम मात्रा में कीटनाशक का उपयोग कर रहे हैं।
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