प्राकृतिक खेती : सतत कृषि का आधार

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Authors

  • Aradhika Tripathi ICAR-IARI Regional Station, Katrain, Kullu
  • चन्द्र प्रकाश भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय स्टेशन, कटराई, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश 175129
  • संदीप कुमार भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय स्टेशन, कटराई, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश 175129

Abstract

प्राकृतिक खेती एक समन्वित एवं रसायन-मुक्त कृषि प्रणाली है, जो परंपरागत कृषि ज्ञान और पारिस्थितिकीय सिद्धांतों पर आधारित है। यह पद्धति फसलों, वृक्षों और पशुधन को कार्यात्मक जैव विविधता के साथ एकीकृत कर उत्पादन क्षमता बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने और जल संरक्षण सुनिश्चित करने में सहायक है। प्राकृतिक खेती को एक लागत-प्रभावी एवं दीर्घकालिक रूप से व्यवहार्य विकल्प माना जाता है, जो किसानों की बाहरी रासायनिक निविष्ट पर निर्भरता घटाने के साथ ग्रामीण आजीविका में योगदान देती है। इसका मूल दर्शन ‘प्रकृति के साथ सामंजस्य’ है, जो खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन, ग्रामीण पुनरुत्थान और सतत विकास को सुदृढ़ करता है।

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Published

2026-03-20

How to Cite

Tripathi, A., चन्द्र प्रकाश, & संदीप कुमार. (2026). प्राकृतिक खेती : सतत कृषि का आधार. खेती, 78(11). https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1608