खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में बढ़ता श्री अन्न का महत्व
95 / 139Abstract
भारत ने वैश्विक खाद्य और पोषण सुरक्षा के स्थायी समाधान के रूप में श्री अन्न ;मिलेट्सद्ध को विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया। इसकी विशेषताओं को देखते हुए इसे पारंपरिक ‘कदन्न’ या ‘मोटा अनाज’ की बजाय ‘श्री अन्न’ नाम दिया गया, जिसका अर्थ है ‘श्रेष्ठ अन्न’। ये पफसलें न केवल जलवायु परिवर्तन की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उगाई जा सकती हैं, बल्कि ये खाद्य और पोषण सुरक्षा के साथ-साथ पशु-पक्षियों के लिए चारा और औद्योगिक उपयोगों में भी सक्षम हैं। भारत के नेतृत्व में वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय श्री अन्न वर्ष के रूप में मनाया गया। सरकार द्वारा श्री अन्न अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इस क्रम में, भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में उन्नत किया गया, ताकि सतत कृषि के माध्यम से विश्व को लाभान्वित किया जा सके। जलवायु परिवर्तन, घटते संसाधन और बढ़ते तापमान की चुनौतियों से निपटने हेतु इस संस्थान को श्री अन्न और प्राचीन अनाज पर अंतर्राष्ट्रीय पहल ‘महर्षि’ का सचिवालय बनाया गया। यह पहल विश्वस्तरीय अनुसंधान सहयोग और सतत कृषि के प्रसार को प्रोत्साहित करेगी।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2026 खेती

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।