बहुआयामी कृषि मॉडल से आत्मनिर्भरता

46 / 49

Authors

Keywords:

किसान आय, किसान की आय , आत्मनिर्भरता , कृषि , कृषि उद्यमिता, कृषि जैव विविधता, नियंत्रित वातावरण कृषि

Abstract

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय के विविध स्रोतों का विकास लघु एवं सीमांत किसानों के लिए स्थायी आजीविका का आधार बनता जा रहा है। प्रस्तुत लेख “किसान निरंजन मंडल ने विविध स्रोतों से आय बढ़ाकर चमकाई स्वयं की किस्मत” में एक साधारण कृषक की प्रेरक सफलता-गाथा का विश्लेषण किया गया है, जिसने पारंपरिक एकल फसल-आधारित खेती से आगे बढ़कर बहुआयामी कृषि एवं कृषिगत उद्यमों को अपनाकर आर्थिक उन्नति प्राप्त की। अध्ययन से ज्ञात होता है कि फसल विविधीकरण, सब्जी उत्पादन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्यपालन तथा पूरक कृषि-व्यवसायों के समन्वित मॉडल ने निरंजन मंडल की आय को वर्षभर स्थिर और बहुगुणित बनाया, साथ ही कृषि जोखिम को भी कम किया। निरंजन मंडल द्वारा उन्नत कृषि तकनीकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग कर संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया गया, जिससे उत्पादकता, लाभांश तथा बाजार पहुँच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। विविध आय स्रोतों के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई, रोजगार के अवसर बढ़े तथा जीवन-स्तर में सुधार आया। यह केस-अध्ययन दर्शाता है कि एकीकृत कृषि प्रणाली एवं बहु-आय मॉडल ग्रामीण किसानों के लिए आत्मनिर्भरता, जोखिम प्रबंधन और सतत विकास का प्रभावी मार्ग है। अतः किसानों को विविधीकृत कृषि-उद्यम अपनाने हेतु तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग तथा विपणन समर्थन उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है, जिससे कृषि-आधारित आजीविका अधिक सुदृढ़ एवं समृद्ध बन सके।

Downloads

Download data is not yet available.

Author Biography

  • द्वारका, 7773879233

    PhD, JNKVV, JABALPUR, MP- 470775

Downloads

Published

2026-07-16

How to Cite

द्वारका. (2026). बहुआयामी कृषि मॉडल से आत्मनिर्भरता. खेती, 79(3). https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1760