ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता स्वरोजगार एवं सशक्तिकरण

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Authors

  • अभिजीत कुडेरिया jawaharlal nehru krishi vishwavidyalaya jabalpur mp
  • चेतना पाठक जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर – 482004 - (म.प्र.)

Keywords:

आजीविका उद्यमिता, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, युवा उद्यमिता, मूल्य संवर्धन, किसान उत्पादक संगठन, डिजिटल कृषि, हरित उद्यमिता, कौशल विकास, आत्मनिर्भर भारत।

Abstract

आजीविका उद्यमिता ग्रामीण भारत में आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक समावेशन एवं सतत विकास का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। पारंपरिक कृषि आय के सीमित विकल्पों के बीच स्थानीय संसाधनों, कौशल विकास, नवाचार एवं मूल्य संवर्धन पर आधारित सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ग्रामीण परिवारों को वैकल्पिक और स्थायी आय प्रदान कर रहे हैं। विशेष रूप से महिलाओं एवं युवाओं द्वारा संचालित उद्यमों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है। कृषि आधारित गतिविधियाँ जैसे पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, जैविक खेती एवं खाद्य प्रसंस्करण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बना रही हैं। किसान उत्पादक संगठन (FPO) सामूहिक विपणन और तकनीकी सहयोग के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। डिजिटल तकनीकों-ई-मार्केटिंग, डिजिटल भुगतान एवं सोशल मीडिया-ने ग्रामीण उद्यमियों को सीधे बाजार से जोड़कर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाई है। साथ ही, हरित उद्यमिता एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन पद्धतियाँ दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करती हैं। इस प्रकार, आजीविका उद्यमिता आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में एक सशक्त रणनीतिक उपकरण के रूप में स्थापित हो रही है।

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Published

2026-07-16

How to Cite

अभिजीत कुडेरिया, & चेतना पाठक. (2026). ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता स्वरोजगार एवं सशक्तिकरण. खेती, 79(3). https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1768