कृषि उपकरण बैंक द्वारा उद्यमिता को बढ़ावा
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—f"k e'khujh] , laj{k.k —f"k , Qly mRiknu, Je laj{k.kAbstract
कृषि यंत्रीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें खाद्य उत्पादन बढ़ाने तथा शारीरिक श्रम को कम करने के लिए उपकरणों और तकनीकों का उपयोग किया जाता है। पहले खेती के तरीके अधिक समय लेने वाले और कठिन थे। यांत्रिक शक्ति का सीधा संबंध फसल उत्पादकता और कृषि कार्यों की समयबद्धता से भी है। इसी कारण कृषि यंत्रीकरण को अपनाना आवश्यक है। कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) ऐसी सुविधा है, जहाँ कृषि उपकरण, यंत्र एवं मशीनें किसानों को किराए पर उपलब्ध करवायी जाती हैं। छोटे, सीमांत और गरीब किसान अपनी आवश्यकता अनुसार कम लागत पर इन उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं। इससे किसानों को समय पर खेती शुरू करने में सहायता मिलती है। इसी दिशा में बिहार के बांका जिले के प्रगतिशील किसान श्री रूपेश कुमार चौधरी ने कृषि यंत्रीकरण को अपनाकर न केवल अपनी खेती की लागत को कम किया, बल्कि कृषि उपकरण बैंक की स्थापना कर आसपास के किसानों को भी आधुनिक कृषि मशीनों का लाभ उपलब्ध करवाया। इनके प्रयासों से क्षेत्र में मशीनीकृत खेती को बढ़ावा मिला है तथा किसानों की आय और उत्पादन क्षमता में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है।
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