धान में अजोला की उपयोगिता

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Authors

  • आशीष राय कृषि विज्ञान केन्द्र-परसौनी
  • अरविन्द कुमार सिंह कृषि विज्ञान केन्द्र-सारण
  • जीर विनायक कृषि विज्ञान केन्द्र-पिपराकोठी
  • अंशु गंगवार कृषि विज्ञान केन्द्र-परसौनी
  • निधि कुमारी कृषि विज्ञान केन्द्र-जाले, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा समस्तीपुर (बिहार)

Abstract

अजोला एक जलीय फर्न है, जिसकी पत्तियों में एनाबिना नामक नील हरित शैवाल पाया जाता है। यह कम लागत और कम समय में तैयार होने वाली एक उत्कृष्ट हरी खाद
है, जो खरीफ की खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेष रूप से धान की फसल के लिए अजोला को वरदान माना जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में नाइट्रोजन पोषक तत्व पाया जाता है, जिससे धान के पौधों की वृद्धि एवं विकास बेहतर होता है। धान की फसल में रोपाई के 10 से 15 दिनों बाद, पानी से भरे खेत में अजोला को 1 कि.ग्रा. प्रति वर्ग
मीटर की दर से डाला जा सकता है। यह खेत के पानी की सतह पर हरे रंग की परत के रूप में फैल जाता है और धीरे-धीरे मृदा में मिलकर पोषक तत्व उपलब्ध करवाता
है। अजोला के प्रयोग से मृदा का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। यह देखा गया है कि यदि वर्मीकम्पोस्ट एवं सामान्य खाद बनाने में अजोला का उपयोग किया जाए, तो केंचुओं का
वजन और विकास तेजी से होता है। इसके साथ ही खाद में जैविक घटकों की मात्रा बढ़ती है, जिससे खेत में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ती है और मृदा की उर्वराशक्ति में
सुधार होता है।

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Published

2026-03-20

How to Cite

आशीष राय, अरविन्द कुमार सिंह, जीर विनायक, अंशु गंगवार, & निधि कुमारी. (2026). धान में अजोला की उपयोगिता. खेती, 78(10), 29-30. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1849