सोयाबीन में फलियां कम बनने की समस्या का समाधान

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Authors

  • संतोष कुमार सिंह
  • अपर्णा जायसवाल
  • आराधना कुमारी

Keywords:

सोयाबीन, फलियाँ न बनना, पुष्प झड़ना, पोषक तत्व असंतुलन, पर्यावरणीय तनाव

Abstract

सोयाबीन विदिशा ज़िले की खरीफ मौसम की प्रमुख नकदी फसल है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 32,500 हेक्टेयर है और अधिकांश किसान इसकी खेती पर निर्भर हैं। यह फसल प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किंतु अक्सर किसानों को यह समस्या आती है कि पौधे हरे-भरे होकर फूल तो देते हैं, परंतु फलियाँ नहीं बन पातीं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। फलियाँ न बनने के मुख्य कारणों में सूक्ष्म पोषक तत्वों (बोरॉन, मोलिब्डेनम, पोटाश, कैल्शियम) की कमी, अत्यधिक नाइट्रोजन से वनस्पतिक वृद्धि, नमी असंतुलन (सूखा या जलभराव), कीट एवं रोग प्रकोप, अनुचित बुवाई समय व किस्म चयन तथा पौधों पर मौसम/तनाव का प्रभाव शामिल हैं। समाधान हेतु बोरैक्स, अमोनियम मोलिब्डेट, पोटाश का छिड़काव, वृद्धि नियंत्रक (CCC, NAA), संतुलित सिंचाई, कीट-रोग प्रबंधन तथा समय पर बुवाई व उपयुक्त किस्मों का चयन आवश्यक है। साथ ही हार्मोनल (सलिसिलिक एसिड, थायोयूरिया) एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के छिड़काव से भी फलियाँ बढ़ाई जा सकती हैं। उचित प्रबंधन अपनाने से किसानों को उच्च उत्पादन और लाभ सुनिश्चित हो सकता है।

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Published

2026-06-05

How to Cite

सिंह संतोष कुमार, जायसवाल अपर्णा, & कुमारी आराधना. (2026). सोयाबीन में फलियां कम बनने की समस्या का समाधान. खेती, 79(2), 16-17. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1852