मूल्य शृंखला और गौण उद्यम से भरपूर अवसर

39 / 67

Authors

  • सर्वेश कुमार Shri Durga Ji P. G. College, chandeshwar, azamgarh UP 276128

Keywords:

कृषि मूल्य श्रृंखला, सहायक कृषि उद्यम, कृषि मूल्य संवर्धन, कृषि प्रसंस्करण

Abstract

कृषि क्षेत्र में किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए कृषि मूल्य श्रृंखला तथा द्वितीयक (गौण)  का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कृषि मूल्य श्रृंखला उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, विपणन और उपभोग तक की परस्पर जुड़ी हुई गतिविधियों का एक संगठित तंत्र है, जिसमें प्रत्येक चरण पर उत्पाद का मूल्य संवर्धन होता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, उपयोगिता तथा बाजार प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होती है। द्वितीयक उद्यम—जैसे कृषि-प्रसंस्करण इकाइयाँ, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और विपणन सेवाएँ—कृषि उत्पादों के प्रभावी प्रबंधन और मूल्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन उद्यमों के विस्तार से पोस्ट-हार्वेस्ट हानि में कमी, कृषि उत्पादों की बेहतर बाजार पहुँच, तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर उत्पन्न होते हैं। परिणामस्वरूप, कृषि मूल्य श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण और द्वितीयक उद्यमों का प्रोत्साहन किसानों की आय वृद्धि के साथ-साथ समावेशी और सतत ग्रामीण विकास को भी सुनिश्चित करता है।

Downloads

Download data is not yet available.

Downloads

Published

2026-06-05

How to Cite

सर्वेश कुमार. (2026). मूल्य शृंखला और गौण उद्यम से भरपूर अवसर. खेती, 79(2), 10-13. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1952