नैरोबी मक्खी का आतंक तथा बचाव

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Authors

  • सुदीपा कुमारी झा भाकृअनुप, केएबी-1, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • मो. मोनोब्रुल्लाह भाकृअनुप, केएबी-1, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • अंजनी कुमार भाकृअनुप, केएबी-1, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • केशव भाकृअनुप, केएबी-1, पूसा, नई दिल्ली-110012

Abstract

नैरोबी मक्खी एक मित्रा कीट है। यह न तो काटती है और न ही डंक मारती है। शरीर के किसी भी अंग पर इसके बैठने पर खुजलाहट, जलन तथा घाव हो जाता है। कभी-कभी तो आंखों की रोशनी भी चली जाती है। ऐसा पेडेरिन नामक पदार्थ के स्राव से होता है। जब भी नैरोबी मक्खी शरीर पर बैठे तो बिना स्पर्श किये उड़ा देना चाहिए और आंख को छूने से बचना चाहिए।

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Published

2023-03-17

How to Cite

झा सुदीपा कुमारी, मोनोब्रुल्लाह मो., कुमार अंजनी, & केशव. (2023). नैरोबी मक्खी का आतंक तथा बचाव. खेती, 75(11), 20. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/202