सतत कृषि में लाभकारी है मसूर उत्पादन
73 / 66Abstract
मसूर न केवल पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि यह किसानों के लिए एक लाभकारी और बहुउद्देशीय फसल के रूप में भी उभर रही है। इसकी खेती में सिंचाई
एवं रासायनिक उर्वरकों की अपेक्षाकृत कम आवश्यकता होती है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और लाभांश में वृद्धि होती है। साथ ही, यह एक नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने
वाली दलहनी पफसल है, जो मृदा की उर्वरता में सुधार कर पफसलचक्र को संतुलित बनाए रखने में सहायक होती है। परिणामस्वरूप, किसान बेहतर उपज के साथ-साथ टिकाऊ खेती की दिशा में भी आगे बढ़ते हैं। भारत में पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा दालों के आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के बीच मसूर की उपयोगिता पुनः केंद्र में आ गई है। यह अब केवल पारंपरिक दाल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पोषण समृद्ध, पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकल्प के रूप में स्थापित
हो रही है। बदलते जलवायु परिदृश्य में यह पफसल देश की खाद्य प्रणाली को अधिक लचीला एवं टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2026 खेती

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License.
खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।