लाख की वैज्ञानिक खेती से मिली समृद्धि
2 / 4Keywords:
लाख , वैज्ञानिक प्रशिक्षण , रोजगार , बीज संचारAbstract
झारखण्ड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखण्ड अंतर्गत सुमिगबेड़ा गाँव के किसान श्री सलेम गुरिया की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि किसानों को सही समय पर वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और मेहनत का साथ मिल जाए, तो वे अपनी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन ला सकते हैं। कभी गरीबी और मजदूरी के सहारे जीवनयापन करने वाले सलेम गुरिया आज लाख उत्पादन के माध्यम से लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं तथा अपने क्षेत्र के अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का स्रोत बन चुके हैं।
सलेम गुरिया एक साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवार से आते हैं। उनके पास लगभग 70 कुसुम के पेड़ हैं, लेकिन लाख की वैज्ञानिक खेती की जानकारी के अभाव में इन पेड़ों का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा था। परिवार की आजीविका मुख्य रूप से धान एवं गेहूँ की खेती पर निर्भर थी। खेती से होने वाली आय सीमित होने के कारण परिवार का भरण-पोषण कठिनाई से हो पाता था। आर्थिक तंगी इतनी अधिक थी कि खेती के साथ-साथ उन्हें मजदूरी भी करनी पड़ती थी, ताकि परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2026 खेती

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License.
खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।