सूरजमुखी की वैज्ञानिक खेती

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Authors

  • देवेश कुमार ANDUAT Ayodhya UP

Keywords:

मुख्य शब्दः सूरजमुखी, खेत की तैयारी, पैकेज एवं प्रक्टिस, कृषि मशीनरी, लागत और आय

Abstract

सूरजमुखी (ैनदसिवूमत) एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है, जो अपनी उच्च तेल गुणवत्ता, कम अवधि तथा विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में अनुकूलन क्षमता के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। भारत में खाद्य तेलों की बढ़ती मांग को देखते हुए तिलहन उत्पादन में वृद्धि करना समय की आवश्यकता है। इस दिशा में सूरजमुखी की खेती सतत ;ैनेजंपदंइसमद्ध तिलहन उत्पादन का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। सूरजमुखी के बीजों में 38.45 प्रतिशत तक उच्च गुणवत्ता का तेल पाया जाता है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी असंतृप्त वसीय अम्लों से भरपूर होता है। यह फसल कम समय (90.120 दिन) में तैयार हो जाती है तथा खरीफ, रबी एवं जायद तीनों मौसमों में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है। इसकी गहरी जड़ प्रणाली मिट्टी से नमी एवं पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करती है, जिससे सीमित सिंचाई की परिस्थितियों में भी अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है।
सूरजमुखी को फसल चक्र में शामिल करने से भूमि की उर्वरता बनाए रखने, कीट एवं रोगों के प्रकोप को कम करने तथा कृषि प्रणाली की स्थिरता बढ़ाने में सहायता मिलती है। आधुनिक किस्मों, संतुलित पोषण प्रबंधन, समय पर बुवाई तथा समेकित कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर इसकी उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। अतः सूरजमुखी की वैज्ञानिक खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि देश की खाद्य तेल आत्मनिर्भरता एवं सतत तिलहन उत्पादन सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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Published

2026-10-15

How to Cite

देवेश कुमार. (2026). सूरजमुखी की वैज्ञानिक खेती. खेती, 79(6), 6-7. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/2259