बहुवर्षीय दलहनी प्रजातियों से पौष्टिक चारा
165 / 62Abstract
देश के अधिकतर चराई के क्षेत्रों से पशुओं को अक्सर पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक चारा प्राप्त नहीं हो पाता है, जिससे उनकी क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं मिलता है। चराई के इन क्षेत्रों से पशुओं को भरपूर मात्रा में पौष्टिक चारा नहीं मिलने का मुख्य कारण एकवर्षीय निम्नकोटि की कम उपजाऊ पफसल एवं खरपतवारों की अधिकता और बहुवर्षीय पौष्टिक दलहनी चारे की कमी का होना है। इन क्षेत्रों के चारे में प्रोटीन की मात्रा भी बहुत कम (3-4 प्रतिशत) होती है, जबकि पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य एवं उत्पादन के लिए चारे में कम से कम उसके आहार में 7 प्रतिशत प्रोटीन होना चाहिए। अतः चारे में प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाने के लिए चराई के इन क्षेत्रों में बहुवर्षीय पौष्टिक दलहनी चारे जैसे-स्टाइलो, क्लाइटोरिया, हेज लूसर्न इत्यादि का होना बहुत आवश्यक है। दलहनी चारा होने से भूमि की उर्वरता में भी बृद्धि होती है। इनका पफैलाव अधिक होने से ये पफसलें भूमि को अच्छी तरह ढककर रखती हैं, जिससे मृदा का कटाव भी कम होता है और हानिकारक खरपतवार का नियंत्राण हो जाता है । इन दलहनी चारे में क्रूड प्रोटीन लगभग 10 से 15 प्रतिशत होता है और इनसे प्रति हैक्टर 200 से 300 क्विंटल पौष्टिक
हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2023 खेती

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।