शूकरों के चयन के मानदंड
71 / 55Abstract
वर्तमान में उत्तम मांस की बढ़ती मांग की आपूर्ति के लिए शूकर पालन को एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इस व्यवसाय में न केवल प्रारम्भिक निवेश कम है, बल्कि कम अंतराल में ही अधिक लाभ भी अर्जित किया जा सकता है। पारंपरिक रूप से शूकर पालन मुख्यतः सामाजिक एवं आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्गों द्वारा किया जाता था। फलस्वरूप उनके पास बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं की अनुपलब्धता रही है। इसके साथ ही उचित आवास, संतुलित आहार और वैज्ञानिक ढंग से शूकर पालन प्रबंधन करने के लिए उचित साधन एवं जानकारी की भी कमी रही है। इन अभावों की अवस्था में शूकर पालन से उचित लाभ न होने के कारण, प्रारम्भिक काल में यह क्षेत्रा किसानों को आकर्षित कर पाने में असफल रहा। इसलिए, भारतीय शूकर उद्योग को आधुनिक बनाने और छोटे आकार के ग्रामीण शूकर पफाॅर्मों की उत्पादकता में सुधार करने के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधानों की आवश्यकता है। इसके ही साथ अधिक मात्रा में श्रेष्ठ गुणवत्ता वाले मांस का उत्पादन करने में सक्षम शूकरों के वैज्ञानिक प्रजनन के लिए उपयुक्त योजनाएं भी जरूरी हैं।
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