हरी सोयाबीन की खेती

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Authors

  • प्रिया परदेशी भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012
  • दारासिंह राठौड़ डा. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ, अकोला-444104
  • शिखा दुबे भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012
  • अक्षय तालुकदार भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012

Abstract

हरी सोयाबीन, दलहन की फसल है। इसके दानों का सेवन, फलियां परिपक्व किंतु हरी हों, तब किया जाता है। इस प्रकार के सोयाबीन की कटाई भी 70 से 75 दिनों के बीच हो जाती है। विश्व में इसको ‘इडामामे’ के नाम से भी जाना जाता है। जापान, पूर्व एशिया, चीन, थाईलैंड और ताइवान आदि देशों में प्रमुखता से उगाया जाता है। जापान इसका सबसे बड़ा व्यावसायिक उत्पादक है। हरी सोयाबीन का उपयोग पहली बार लगभग 200 ई.पू. के दौरान एक औषधीय वनस्पति के रूप में दर्ज किया गया था। पौष्टिक एवं औषधीय पफसल के रूप में सोयाबीन की बढ़ती लोकप्रियता के कारण वर्तमान में इसकी मांग पुरजोर बढ़ रही है।

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Published

2023-07-04

How to Cite

परदेशी प्रिया, राठौड़ दारासिंह, दुबे शिखा, & तालुकदार अक्षय. (2023). हरी सोयाबीन की खेती. खेती, 76(3), 4-5. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/458