सूखाग्रस्त क्षेत्रों में खेती
422 / 47Abstract
जब किसी क्षेत्रा विशेष में होने वाली वर्षा की कुल मात्रा उस स्थान पर होने वाले वाष्पीकरण से कम होती है, तो इस स्थिति को सूखा तथा ऐसे स्थानों को सूखाग्रस्त क्षेत्रा कहते हैं। भारत का 68 फीसदी क्षेत्रा सूखे की चपेट में है। जनसंख्या वृद्धि की दर को देखते हुए इन सूखाग्रस्त क्षेत्रों का प्रभावी उपयोग करना बहुत जरूरी है, किन्तु ‘बिन पानी सब सून’, सच है। बिना जल के बड़े पैमाने पर खेती कर पाना असंभव है। अतः वर्षा जल के संचयन, संरक्षण और दक्षतापूर्ण उपयोग से ही खेती संभव है, जिसे उचित भूपरिष्करण, मल्चिंग, कम अवधि वाली किस्मों आदि तकनीकियों द्वारा संभव किया जा सकता है।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2023 खेती

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।