सांवां की प्राकृतिक खेती
166 / 69Abstract
असिंचित क्षेत्रों में बोये जाने वाले श्रीअन्न में सांवां का महत्वपूर्ण स्थान है। यह भारत की एक प्राचीन फसल है। यह सामान्यतः असिंचित क्षेत्रा में बोयी जाने वाली सूखा प्रतिरोधी फसल है। इसमें पानी की आवश्यकता अन्य फसलों से कम है। हल्की नम व उष्ण जलवायु इसके लिए सर्वोत्तम होती है। सामान्यतः सांवां का उपयोग चावल की तरह किया जाता है। उत्तर भारत में सांवां की खीर बड़े चाव से खाई जाती है। इसका हरा चारा पशुओं को बहुत पसंद है। इसमें चावल की तुलना में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें पाई जाने वाली प्रोटीन की पाचन शक्ति सबसे अधिक (40 प्रतिशत) होती है।
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