अगस्त के मुख्य कृषि कार्य
288 / 209Abstract
अगस्त माह, जिसे आप श्रावण-भाद्रपद भी कहते हैं, खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। देश में कृषि, सदियों से गांवों में बसे हुये लोगों के जीवन निर्वाह का सहारा तथा परम्परागत व्यवसाय रहा है। यह न केवल देश की दो-तिहाई जनसंख्या की आजीविका सुरक्षा पद्धति की मेरुदण्ड ही है, बल्कि उनकी आर्थिकी, व्यापारिकी एवं सामाजिक प्रतिष्ठा की प्रतीक भी है। आज भारत कृषि उत्पादन में विश्व के शीर्ष पांच देशों में शामिल है। हम चावल, गेहूं, सब्जियां व फल, मछली, अण्डे, दुग्ध और दलहन के बड़े उत्पादक तथा कृषि उत्पाद के निर्यातक भी हैं। इस विकास के बावजूद, वर्तमान में कृषि पर निरन्तर बढ़ रही जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन और इससे जुड़े खतरे, प्राकृतिक संसाधनों की क्षीण होती उपलब्धता, मजदूरी की समस्या, उत्पादन की बढ़ रही लागत, बाजार की अनिश्चितता, भोजन की खपत का बदल रहा स्वरूप और आय में अत्यधिक असमानता जैसे दबाव बढ़ गये हैं। देश के कृषि क्षेत्रा में प्राप्त उपलब्धियों को बनाये रखने के लिए न केवल नवोन्मेषी तकनीकियां विकसित करने की आवश्यकता है, बल्कि इन तकनीकियों को कृषक समुदाय में स्थानांतरित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कृषि समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकियों के विकास और स्थानांतरण में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों एवं कृषि विश्वविद्यालयों की प्रमुख भूमिका सर्वज्ञात है। देशभर में कृषि तकनीकियों के स्थानांतरण के लिए अनेक नवोन्मेषी प्रसार क्रियाविधियों को भी विकसित किया गया है। समय की मांग यह है कि किसानों में इन नई तकनीकियों में तेजी से प्रसार लाने के लिए प्रणालियों की दक्षता को बढ़ाया जाए। सूचना का प्रभावी प्रवाह और तकनीक समर्थन की उपलब्धता अत्यधिक अनिवार्य है।
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