संरक्षित कृषि तकनीक से दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन
125 / 79Abstract
भारत में धान परती भूमि वाले क्षेत्रा रबी मौसम में खाली या परती रह जाते हैं। ये पफसल की गहनता के माध्यम से एक सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं। देश के पूर्वी भाग में कुल धान परती का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा है। पूर्वोत्तर भारत में अधिकांश क्षेत्रों में कृषि पूरी तरह से वर्षा आश्रित है और सिंचाई के सीमित संसाधनों के कारण रबी मौसम में खेत परती ही रह जाते हैं। संरक्षित कृषि तकनीक के अंतर्गत खेतों की शून्य जुताई (जीरो टिलेज) द्वारा खेती की जाती है। पिछली फसल के अवशेषों का मृदा की सतह पर उचित प्रबंधन कर दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बुआई कर तत्काल लाभ प्राप्त होता है। इस पद्धति को अपनाकर कृषि लागत कम रखते हुए लाभ व उत्पाद लिया जा सकता है।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2024 खेती

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।