अरहर में उकठा रोग प्रबंधन

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Authors

  • संजीव कुमार बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर-813210 (बिहार)
  • महेश कुमार बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर-813210 (बिहार)
  • मो. शमीम बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर-813210 (बिहार)
  • राकेश कुमार बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर-813210 (बिहार)
  • हंसराज हंस बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर-813210 (बिहार)

Abstract

अरहर की फसल अनेक प्रकार के रोगों से प्रभावित होती है। इनमें उकठा एक प्रमुख विनाशकारी रोग है। यह रोग सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है। अरहर उगाने वाले कुछ राज्यों जैसे-उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार में इसके द्वारा बहुत अधिक हानि होती है। एक ही खेत में लगातार अरहर की फसल लेने से इस रोग से लगभग 50 प्रतिशत पौधे सूखकर नष्ट हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में इसकी खड़ी फसल को इस रोग के कारण प्रतिवर्ष लगभग 5-10 प्रतिशत तक की हानि होती है। इसकी दाल को प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। कृषकों को अरहर की खेती से अधिक पैदावार लेने के लिए खेत की अच्छी तैयारी, उन्नत किस्मों का चयन, समय पर बुआई तथा संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरकों के प्रयोग करने की
सलाह दी जाती है। इसके रोगों का समुचित प्रबंधन करके इनसे होने वाली हानि को कम किया जा सकता है।

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Published

2024-04-02

How to Cite

संजीव कुमार, महेश कुमार, मो. शमीम, राकेश कुमार, & हंसराज हंस. (2024). अरहर में उकठा रोग प्रबंधन. खेती, 76(9), 29-30. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/974