ट्राइकोडर्मा की बढ़ती उपयोगिता

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Authors

  • राहुल सिंह राजपूत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी-221005 (उत्तर प्रदेश)
  • पूजा कुमारी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी-221005 (उत्तर प्रदेश)
  • प्रदीप कुमार विश्वकर्मा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी-221005 (उत्तर प्रदेश)
  • बी.सी. अनु बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी-221005 (उत्तर प्रदेश)
  • एस.के. गंगवार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी-221005 (उत्तर प्रदेश)

Abstract

ट्राइकोडर्मा मिट्टी में पाया जानेवाला एक फपूंफद है। यह फपूंफद पौधों के जड़-विन्यास क्षेत्रा (राइजोस्पिफयर) में खामोशी से अनवरत कार्य करने वाला सूक्ष्म कार्यकर्ता है। यह एक अरोगकारक मृदोपजीवी कवक है, जो प्रायः कार्बनिक अवशेषों पर पाया जाता है। इसकी कई प्रजातियां हैं। इनमें ट्राइकोडर्मा विरिडी, ट्राइकोडर्मा हारजिएनम, ट्राइकोडर्मा वाइरेन्स अधिक उपयोगी प्रजातियां हैं। यह बहुत ही महत्वपूर्ण एवं कृषि की दृष्टि से उपयोगी है। यह पफपूंफद हरे रंग की होती है।

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Published

2024-04-02

How to Cite

राहुल सिंह राजपूत, पूजा कुमारी, प्रदीप कुमार विश्वकर्मा, बी.सी. अनु, & एस.के. गंगवार. (2024). ट्राइकोडर्मा की बढ़ती उपयोगिता. खेती, 76(9), 35-36. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/977