शक्तिचालित थ्रेशर से गेहूं की मड़ाई

248 / 56

Authors

  • अंशु गंगवार भाकृअनुप का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना (बिहार)
  • अरविन्द कुमार सिंह भाकृअनुप का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना (बिहार)
  • पवन जीत भाकृअनुप का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना (बिहार)
  • आशीष राय भाकृअनुप का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना (बिहार)

Abstract

बालियों या फली से दानों को अलग करने की क्रिया को मड़ाई कहा जाता है। यह मुख्यतः फसल की बालियों को पीटकर/तोड़कर/रगड़कर पौधे से अनाज को हटाने की क्रिया है। आमतौर पर मड़ाई, अनाज की नमी 15-17 प्रतिशत तक कम हो जाने के बाद की जाती है। यदि थ्रेशिंग समय पर नहीं की जाती है, तो किसानों द्वारा किए गए सभी प्रयास और फसल को दिए गए आदान बर्बाद हो जाते हैं। पारंपरिक विधि में मानव द्वारा मड़ाई करने के लिए 150-230 व्यक्ति/घंटा/हैक्टर की आवश्यकता होती है। इससे बहुत अधिक खर्चा होता है। पशु द्वारा थ्रेशिंग की पारंपरिक विधि बहुत धीमी है और उत्पादन कम प्राप्त होता है। अनाज के नुकसान के कारण कम उत्पादन के साथ-साथ ऑप्रेशन की लागत भी अधिक है। इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए गेहूं के थ्रेशर बहुत लाभदायक सिद्ध हुए हैं।

Downloads

Download data is not yet available.

Downloads

Published

2024-04-03

How to Cite

अंशु गंगवार, अरविन्द कुमार सिंह, पवन जीत, & आशीष राय. (2024). शक्तिचालित थ्रेशर से गेहूं की मड़ाई. खेती, 76(10), 4-5. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/983