पौधशाला से बढ़ाएं आमदनी

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Authors

  • अर्चना वर्मा भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क क्षेत्रा अनुसंधान संस्थान, जोधपुर (राजस्थान)
  • दीपिका हाजोंग भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क क्षेत्रा अनुसंधान संस्थान, जोधपुर (राजस्थान)
  • प्रमेन्दर भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क क्षेत्रा अनुसंधान संस्थान, जोधपुर (राजस्थान)
  • कमलेश पारीक भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क क्षेत्रा अनुसंधान संस्थान, जोधपुर (राजस्थान)

Abstract

वर्तमान में प्रमाणित पौधशालाओं द्वारा रोपण सामग्री की 30-40 प्रतिशत तक की मांग ही पूरी की जा रही है। शेष मांग को अप्रमाणित पौधशालाओं से पूरा किया जाता है। इसका अर्थ है कि संगठित क्षेत्रा में अधिक पौधशाला स्थापित करने की जरूरत है। इसके लिए किसानों के खेत पर ही कुछ माॅडल पौधशाला स्थापित करने की आवश्यकता है। यहां किसान सहभागी समूह बनाकर पौधशाला स्थापित और विकसित कर सकते हैं। इस प्रक्रिया से किसानों को उनके ही खेत में गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध हों सकेंगे और वे पौधों की बिक्री के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, कृषि वानिकी या बागवानी प्रजातियों की किसी भी सपफल स्थापना का आधार है। किसानों के खेत में पौधशाला की स्थापना, अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ उनके खेत में पौधों की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी पौधशाला विकसित करने से बेरोजगारी, श्रम प्रवास, कृषि में युवाओं को बनाए रखने और कई अन्य चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है।

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Published

2024-04-03

How to Cite

अर्चना वर्मा, दीपिका हाजोंग, प्रमेन्दर, & कमलेश पारीक. (2024). पौधशाला से बढ़ाएं आमदनी. खेती, 76(10), 10-12. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/985