पोषण से भरपूर चारा है अजोला
82 / 49Abstract
भारत में विश्व का 15 प्रतिशत पशुधन उपलब्ध है। ये पशु विश्व के भौगोलिक क्षेत्रापफल का मात्रा 2 प्रतिशत क्षेत्रापफल और 4.90 प्रतिशत कृषित चारा क्षेत्राफल पर निर्भर हैं। वर्ष 2019-20 में कृषि तथा देश की जीडीपी में पशुपालन का क्रमशः 26.00 प्रतिशत तथा 4.11 प्रतिशत योगदान रहा है। पशुपालन से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में 18.80 प्रतिशत रोजगार का सृजन होता है तथा कठिन समय में पशुपालकों का सहारा भी होता है। जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ दूध, दुग्ध उत्पादों तथा मांस की बढ़ती मांग से पशुपालन पर दबाव अत्यधिक बढ़ता जा रहा है। देश में कृषि के अन्तर्गत सकल क्षेत्रापफल के मात्रा 4.9 प्रतिशत क्षेत्रापफल (9.13 मिलियन हैक्टर) में ही चारा उत्पादन किया जाता है। देश में हरे चारे, शुष्क चारे तथा दाना मिश्रण की आवश्यकता तथा उपलब्धता में क्रमशः 25-30 प्रतिशत, 12-14 प्रतिशत तथा 30-35 प्रतिशत की कमी है। अतः पशुओं की अच्छी वृद्धि तथा उत्पादकता को बढ़ाने के लिये वैकल्पिक, किफायती तथा वर्षभर उपलब्धता वाले चारा अनुपूरक स्रोतों को विकसित किया जाना चाहिये। अजोला उत्कृष्ट प्रोटीन से भरपूर चारा है। यह पशुपालन के क्षेत्रा में एक वैकल्पिक चारा स्रोत के रूप में दिन-प्रतिदिन लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। इसमें प्रोटीन, खनिज लवण से भरपूर, कम लिग्निन वाली प्रकृति के पोषक तत्व हैं। यह कम संसाधन वाली परिस्थितियों में पशु आहार के क्षेत्रा में एक टिकाऊ समाधान के रूप में सफल होने की क्षमता रखता है।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2024 खेती

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।