चरागाह के शत्रु पौधे

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Authors

  • पवन कुमार माहौर भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर
  • तरुण कुमार जैन भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर
  • अरुण कुमार तोमर भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर

Abstract

बीसवीं सदी के बाद चरागाह के लिए आरक्षित स्थानों पर मानव द्वारा निरंतर अतिक्रमण से इसका क्षेत्राफल कम होता जा रहा है। इसके साथ ही चरागाह के लिए दूसरा महत्वपूर्ण क्षति पहुंचाने वाला कारक आयातित कृषि उत्पादों के साथ आये हुए हानिकारक पौधों के बीज इत्यादि अंश हैं। ये पौधे भारत में पहले नहीं पाए जाते थे। इन हानिकारक पौधों का तीव्र गति से प्रसार हो रहा है तथा ये हमारे चरागाह को क्षति पहुंचा रहे हैं।

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Published

2024-04-03

How to Cite

पवन कुमार माहौर, तरुण कुमार जैन, & अरुण कुमार तोमर. (2024). चरागाह के शत्रु पौधे. खेती, 76(10), 25-26. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/991