मुर्गीपालन में अजोला की उपयोगिता

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Authors

  • विनोद भटेश्वर श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जाबे नरे , जयपुर-303329 (राजस्थान)
  • हितेश मुवाल महाराणा प्रताप कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर-313001 (राजस्थान)

Abstract

अजोला जल की सतह पर तैरने वाला एक जलीय पफर्न है। इसकी पंखुड़ियों में नील हरित शैवाल (एनाबिना अजोली) सहजैविक के रूप में पाया जाता है। यह शैवाल वायुमंडलीय नाइट्रोजन का यौगिकीकरण करता है। अजोला, शैवाल की वृद्धि के लिए आवश्यक कार्बन स्रोत एवं वातावरण प्रदान करता है। शैवाल वातावरण से नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए उत्तरदायी है। प्राकृतिक रूप से यह उष्ण एवं गर्म उष्णकटिबंधीय छेत्रों में पाया जाता है।

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Published

2024-04-03

How to Cite

विनोद भटेश्वर, & हितेश मुवाल. (2024). मुर्गीपालन में अजोला की उपयोगिता. खेती, 76(10), 40-41. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/997