पर्वतीय क्षेत्रों में समन्वित मछलीपालन
70 / 136सार
पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियां एवं वर्षा आधारित कृषि होने के कारण कृषि उत्पादकता काफी कम है। यहां के किसानों के लिए ऐसी तकनीक विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे कम क्षेत्रापफल में अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके। ऐसे क्षेत्रों में मत्स्यपालन के साथ-साथ मुर्गीपालन तथा सब्जी उत्पादन की समन्वित प्रणाली कारगर है। इससे कृषकों को कम लागत में मछली के अतिरिक्त सब्जी,मुर्गी का मांस व अण्डे के रूप में पौष्टिक एवं प्रोटीनयुक्त आहार भी प्राप्त हो सकते हैं। यह पद्धति अपशिष्ट पदार्थों के पुनरावर्तन एवं उनके निदान के लिए सर्वोत्तम है। इस पद्धति से भूमि और जल संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित होता है।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-sa4.footer##खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।