संरक्षित कृषि प्रणाली से आय वृद्धि

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लेखक

  • गंगा देवी ICAR-ATARI, Zone-II, Jodhpur, Rajasthan
  • Pradeep Pagaria
  • प्रमोद
  • जे.पी. मिश्रा
  • प्रीतम सर्वटे

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फार्मर फस्र्ट प्रोग्राम, एकीकृत कृषि प्रणाली, संरक्षित खेती

सार

पश्चिमी राजस्थान कम और अनियमित वर्षा के कारण जल/संकट, रेतीली एवं पोषक तत्वों से रहित मिट्टी, खराब मृदा उर्वरता और अत्यधिक तापमान और बार बार आने वाले सूखे जैसी कठोर शुष्क जलवायु के कारण गंभीर कृषि चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। किसान बड़े पैमाने पर पारंपरिक कम उपज वाली फसलों पर निर्भर हैं, जिससे वे कीटों, बीमारियों और बाजार में उतार चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं, जबकि अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, सिंचाई और आधुनिक तकनीकों तक सीमित पहुंच उत्पादकता को और बाधित करती है। इस कठिन परिस्थिति में, बलरवा गाँव के एक प्रगतिशील किसान श्री पुख राज ने अपने पारंपरिक खेत को फार्मर फस्र्ट प्रोग्राम के तहत एकीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से एक उच्च प्रदर्शन वाले, टिकाऊ मॉडल में सफलतापूर्वक बदल दिया, जिसे कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर द्वारा भा.कृ.अनु.प-अटारी, जोन-2 के सहयोगी संस्थान के रूप में कार्यान्वित किया गया। वैज्ञानिक सहयोग से, उन्होंने उन्नत फसल किस्मों, एकीकृत कीट प्रबंधन, जैविक पोषक उद्यानों, संरक्षित खेती, फूलों की खेती और वर्षा जल संचयन और सूक्ष्म सिंचाई जैसी कुशल जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाया। उन्होंने कम्पोस्ट खाद के जरिए मिट्टी की सेहत में भी सुधार किया और पशुपालन में विविधता लाकर दूध उत्पादन में 7-10ः की वृद्धि की। इन प्रयासों से उनकी शुद्ध वार्षिक आय रु. 6.55 लाख से बढ़कर      रु.17.21 लाख हो गई, जिससे उनका खेत शुष्क क्षेत्रों में लचीली, विज्ञान आधारित और लाभदायक खेती का एक जीवंत प्रदर्शन स्थल बन गया।

 

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प्रकाशित

2026-07-16