मखाना आधारित उद्यमिता से महिला सशक्तिकरण
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आजीविका, ग्रामीण उद्यमिता, मखाना, वित्तीय समावेशनसार
बिहार में मखाना उत्पादन पारंपरिक आर्द्रभूमि कृषि से विकसित होकर एक उच्च मूल्य, बाजारोन्मुख उद्यम के रूप में उभरा है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की भूमिका तेजी से सशक्त हुई है। बिहार में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित ग्रामीण महिलाएँ मखाना की खेती, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़कर आय, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण की नई दिशा प्राप्त कर रही हैं। राज्य की आजीविका पहल “जीविका” ने महिलाओं को वित्तीय समावेशन, सामूहिक संगठन और कौशल विकास का सशक्त मंच प्रदान किया है, जिसके माध्यम से मखाना आधारित सूक्ष्म उद्यमों की संभावनाएँ सुदृढ़ हुई हैं। यह लेख बिहार में महिलाओं द्वारा संचालित मखाना उद्यमिता की संभावनाओं, उपलब्ध अवसरों, संस्थागत समर्थन, चुनौतियों तथा भविष्य की रणनीतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के संदर्भ में यह क्षेत्र लैंगिक समानता, पोषण सुरक्षा और सतत ग्रामीण विकास के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
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