सफल उद्यमिता में एबीआई-द्राक्षा की प्रभावी भूमिका
34 / 55सार
कृषि में उद्यमिता की सफलता केवल नए उत्पाद बनाने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि किसी स्थानीय संसाधन, शोध आधारित विचार या
पारंपरिक कृषि उत्पाद को किस प्रकार मूल्यवर्धित, उपयोगी और बाजारोन्मुख रूप दिया जाए। जब किसी नवाचार को तकनीकी समझ, प्रसंस्करण, उपभोक्ता की आवश्यकता, बाजार संपर्क और सामाजिक उपयोगिता के साथ जोड़ा जाता है, तब वह आजीविका का मजबूत माध्यम बन सकता है। यही वह दृष्टिकोण है, जो एबीआई-द्राक्षा जैसे मंच को महत्वपूर्ण बनाता है। एक ओर यह शोध और नवाचार को आगे बढ़ाने की संभावना दर्शाता है, तो दूसरी ओर यह बताता है कि किसानों, युवाओं और समुदायों के लिए टिकाऊ उद्यम कैसे विकसित किए जा सकते हैं।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-nd4.footer##खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।