माइक्रोग्रीन्स की खेती

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Authors

  • अंजली कुमारी झा बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपु

Abstract

वैश्विक स्तर पर बढ़ते रोगों और महंगाई को ध्यान में रऽते हुए आजकल लोगों ने अपनी जीवनशैली के साथ खान-पान में भी बदलाव किये हैं। इसी के साथ फ्माइक्रोग्रीन्सय् शब्द ने विश्वस्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। लोग अब स्वस्थ रहने के लिए कई तरह के तरीके अपना रहे हैं। नई तकनीकों का उपयोग करके पोषक फसलों और खाद्यान्न का उत्पादन किसानों द्वारा बहुत तेजी से किया जा रहा है। पौष्टिक फसलों की बात करें तो हरी सब्जियों का नाम सबसे पहले आता है। हरी सब्जियों में माइक्रोग्रीन्स के विभिन्न प्रकार घरों के किचन का हिस्सा तेजी से बनते जा रहे हैं। माइक्रोग्रीन्स या छोटे पौधें की यह खेती स्वास्थ्य के अलावा आर्थिक रूप से भी लाभकारी है।

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Published

2024-06-21

How to Cite

अंजली कुमारी झा. (2024). माइक्रोग्रीन्स की खेती. फल फूल, 45(2), 8-9. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/1147