माइक्रोग्रीन्स की खेती
108 / 54Abstract
वैश्विक स्तर पर बढ़ते रोगों और महंगाई को ध्यान में रऽते हुए आजकल लोगों ने अपनी जीवनशैली के साथ खान-पान में भी बदलाव किये हैं। इसी के साथ फ्माइक्रोग्रीन्सय् शब्द ने विश्वस्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। लोग अब स्वस्थ रहने के लिए कई तरह के तरीके अपना रहे हैं। नई तकनीकों का उपयोग करके पोषक फसलों और खाद्यान्न का उत्पादन किसानों द्वारा बहुत तेजी से किया जा रहा है। पौष्टिक फसलों की बात करें तो हरी सब्जियों का नाम सबसे पहले आता है। हरी सब्जियों में माइक्रोग्रीन्स के विभिन्न प्रकार घरों के किचन का हिस्सा तेजी से बनते जा रहे हैं। माइक्रोग्रीन्स या छोटे पौधें की यह खेती स्वास्थ्य के अलावा आर्थिक रूप से भी लाभकारी है।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2024 फल फूल

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
फल फूल में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।