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सितम्बर-अक्टूबर 2026
Vol. 47 No. 5 (2026)फल-फूल, सितम्बर-अक्तूबर 2026 अंक में बागवानी की विविध फसलों, उन्नत उत्पादन तकनीकों, पौध संरक्षण, पोषण, प्रसंस्करण और उद्यमिता से संबंधित उपयोगी एवं व्यावहारिक लेखों का समावेश किया गया है। इस अंक में अर्धशुष्क क्षेत्रों के लिए बेल की उन्नत किस्म, कीवी की व्यावसायिक खेती, पोषण से भरपूर स्वॉर्ड बीन का उत्पादन, प्याज बीज उत्पादन की वैज्ञानिक विधि तथा पोषण से समृद्ध पारंपरिक सब्जियों पर जानकारी दी गई है। बहुउपयोगी पारंपरिक फल खुमानी, कटहल की उन्नत खेती तथा पर्वतीय क्षेत्रों में पॉलीहाउस में सब्जी उत्पादन जैसे विषय किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।
पुष्प उत्पादन से संबंधित लेखों में गुलाब की उन्नत बागवानी, सौन्दर्य से भरपूर आइरिस पुष्प का उत्पादन तथा लैवेंडर उत्पादन से जुड़ी संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया है। औषधीय पौधों की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए मधुमेह उपचार में प्रभावी जिमनेमा पर भी लेख शामिल है। बागवानी आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली से लाभ वृद्धि विषयक लेख किसानों को विविध उद्यमों के समन्वित उपयोग की जानकारी देता है।
फसल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खीरा फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन तथा बागवानी फसलों में ट्रैप द्वारा कीट प्रबंधन पर व्यावहारिक जानकारी दी गई है। पुष्पों के प्रसंस्करण से ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला लेख मूल्य संवर्धन और रोजगार की संभावनाओं को सामने लाता है। इसके अतिरिक्त सितम्बर-अक्तूबर के मुख्य बागवानी कार्यों पर आधारित सामग्री किसानों को समयानुकूल कृषि कार्यों की योजना बनाने में सहायक होगी। समग्र रूप से यह अंक आधुनिक बागवानी, पोषण, संरक्षण, प्रसंस्करण और उद्यमिता का उपयोगी संकलन है।
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जुलाई-अगस्त 2026
Vol. 47 No. 4 (2026)जैव विविधता विशेषांक
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रस्तुत फल-फूल पत्रिका का जुलाई–अगस्त 2026 अंक "जैव विविधता विशेषांक" के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है। यह विशेषांक कृषि एवं बागवानी जैव विविधता के संरक्षण, संवर्धन और सतत उपयोग के महत्व को रेखांकित करता है तथा भविष्य की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में इसकी भूमिका को उजागर करता है।
इस अंक में फल, सब्जी एवं बागवानी फसलों की आनुवंशिक विविधता, देसी एवं पारंपरिक किस्मों का संरक्षण, भौगोलिक संकेतक (GI) फलों का महत्व, अल्प दोहित फसलों की संभावनाएं, सामुदायिक बीज बैंक, मूल्यवर्धन, जलवायु-अनुकूल बागवानी, महिला कृषकों की भूमिका तथा कृषि जैव विविधता से जुड़े अनेक समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों के लेख शामिल किए गए हैं। साथ ही सफल नवाचारों, उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से यह बताया गया है कि जैव विविधता केवल प्राकृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि किसानों की आय, पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर कृषि का भी मजबूत आधार है।
यह विशेषांक शोधकर्ताओं, कृषि वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों, विस्तार कार्यकर्ताओं, उद्यमियों तथा प्रगतिशील किसानों के लिए उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सामग्री का संकलन है। हमें विश्वास है कि यह अंक कृषि जैव विविधता के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय आनुवंशिक संसाधनों के महत्व को समझने तथा टिकाऊ कृषि एवं बागवानी विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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मई - जून 2026
Vol. 47 No. 3 (2026)‘फल-फूल’ पत्रिका का मई–जून 2026 अंक बागवानी, पोषण, संरक्षित खेती, जलवायु परिवर्तन एवं पारंपरिक खाद्य प्रणालियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सामग्री से समृद्ध है। इस अंक में प्रकाशित लेख किसानों, उद्यमियों, शोधार्थियों तथा बागवानी क्षेत्र से जुड़े पाठकों को आधुनिक तकनीकों एवं व्यावहारिक उपायों की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं।
अंक में ‘हरी पत्तेदार सब्जियों के फायदे अनेक’ तथा ‘गुणों से भरपूर माइक्रोग्रीन्स का उत्पादन’ जैसे लेख पोषण सुरक्षा एवं स्वास्थ्यवर्धक आहार की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। वहीं ‘मशरूम से भरपूर पोषण’ लेख मशरूम की उपयोगिता, पोषणीय महत्व तथा स्वरोजगार की संभावनाओं को रेखांकित करता है। ‘पुष्प उत्पादन में जिनोम संपादन’ लेख में आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की नई संभावनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
कृषि तकनीकों पर आधारित लेखों में ‘पर्वतीय क्षेत्रों में पॉलीहाउस में टमाटर की खेती’, ‘सब्जियों की संरक्षित खेती हेतु पॉलीहाउस तकनीक’ तथा ‘स्वस्थ पौध उत्पादन हेतु सनकन नर्सरी’ विशेष रूप से किसानों के लिए उपयोगी हैं। इसी प्रकार ‘आम में अनियमित फलन की चुनौती का प्रबंधन’ तथा ‘जीरे की उन्नत बीज उत्पादन तकनीक’ फसल उत्पादन बढ़ाने हेतु वैज्ञानिक उपायों की जानकारी प्रदान करते हैं।
इस अंक में पारंपरिक ज्ञान एवं स्थानीय खाद्य प्रणालियों को भी विशेष महत्व दिया गया है। ‘पंचकुट्टा-थर मरुस्थल की पारम्परिक खाद्य प्रणाली’, ‘देसी फलों का महत्व एवं संरक्षण’ तथा ‘शुष्क क्षेत्रों हेतु बेहद उपयोगी कैर’ जैसे लेख जैव विविधता, स्थानीय संसाधनों एवं पारंपरिक ज्ञान संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। साथ ही ‘मूल्यवर्धित आंवला का टिकाऊ उत्पादन’ लेख प्रसंस्करण एवं उद्यमिता की संभावनाओं को सामने लाता है।
इसके अतिरिक्त ‘पुष्पोत्पादन पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव’ तथा ‘मई–जून माह के मुख्य बागवानी कार्य’ जैसे लेख बदलती जलवायु परिस्थितियों में किसानों को समयानुकूल प्रबंधन एवं बागवानी गतिविधियों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह अंक आधुनिक तकनीक, पोषण, संरक्षण एवं टिकाऊ बागवानी को समर्पित एक उपयोगी प्रयास है।
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मार्च - अप्रैल 2026
Vol. 47 No. 2 (2026)‘फल-फूल’ पत्रिका का मार्च–अप्रैल 2026 अंक औषधीय विशेषांक के रूप में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है। बदलती जीवनशैली, बढ़ती स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ तथा प्राकृतिक उपचारों के प्रति बढ़ते रुझान के बीच औषधीय फसलों और पौधों का महत्व निरंतर बढ़ता जा रहा है। भारतीय परंपरा में औषधीय पौधों का उपयोग सदियों से लोक चिकित्सा पद्धतियों में किया जाता रहा है, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
इस विशेषांक में औषधीय फसलों एवं पादपों से संबंधित नवीन, वैज्ञानिक एवं अत्यंत उपयोगी जानकारियों को सरल और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें औषधीय पौधों की उन्नत खेती तकनीक, उपयुक्त किस्में, रोपण विधि, पोषण प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण, कटाई-पश्चात प्रबंधन तथा विपणन संभावनाओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है। साथ ही, औषधीय पौधों के औषधीय गुणों, घरेलू उपयोग तथा आय-सृजन की संभावनाओं को भी सम्मिलित किया गया है।
यह अंक पाठकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, बागवानों, किसानों एवं औषधीय पौधों में रुचि रखने वाले सभी वर्गों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगा। यह औषधीय विशेषांक न केवल ज्ञानवर्धन करेगा, बल्कि पाठकों को औषधीय फसलों की ओर प्रेरित करते हुए स्वस्थ जीवन एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सार्थक कदम साबित होगा।
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जनवरी-फरवरी 2026
Vol. 47 No. 1 (2026)इस अंक में बागवानी, संरक्षित खेती, प्राकृतिक कृषि, मूल्य संवर्धन तथा उद्यमिता से जुड़े विविध उपयोगी और समसामयिक विषयों का समृद्ध संकलन प्रस्तुत है। आम के बागों में वैज्ञानिक सस्य क्रियाओं से लेकर बेर में समेकित नाशीजीव प्रबंधन तक, इस अंक में बागवानी फसलों के उन्नत प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी दी गई है। प्राकृतिक खेती के अंतर्गत मिर्च में नीमास्त्र द्वारा ब्लैक एफिड्स नियंत्रण तथा जड़ वाली सब्जियों के शुद्ध बीज उत्पादन जैसी तकनीकें किसानों और प्रगतिशील उद्यमियों के लिए विशेष उपयोगी सिद्ध होंगी।
इसके साथ ही टमाटर के मूल्य संवर्धन, गलगल छिलके की कैंडी जैसे नवाचार तथा बोनसाई उत्पादन जैसे उभरते व्यवसायिक अवसर युवाओं के लिए नई संभावनाएँ प्रस्तुत करते हैं। संरक्षित खेती के अंतर्गत नेट हाउस में लिलियम उत्पादन तथा हाइब्रिड शिमला मिर्च और लौकी की सफल खेती के अनुभव प्रेरणादायक हैं।
साथ ही छत पर जैविक किचन गार्डन और ग्रीष्मकालीन गेंदा खेती जैसे विषय पाठकों को आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करेंगे। हमें आशा है कि यह अंक आपके ज्ञान और आय वृद्धि दोनों में सहायक सिद्ध होगा।
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नवम्बर - दिसम्बर 2025
Vol. 46 No. 6 (2025)‘फल-फूल’ पत्रिका का नवंबर–दिसंबर 2025 अंक फलोत्पादन, सब्जी उत्पादन, पुष्पोत्पादन, औषधीय पौधों तथा बागवानी की उन्नत तकनीकों से संबंधित उपयोगी एवं व्यावहारिक जानकारी प्रस्तुत करता है। इस अंक में पोषण सुरक्षा, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और आय सृजन की संभावनाओं को विशेष महत्व दिया गया है। इस अंक में पोषण सुरक्षा के लिए पंखी सेम (विंग्ड बीन) का उत्पादन, फालसा फल के मूल्य संवर्धन तथा बेर की वैज्ञानिक खेती पर जानकारी दी गई है। पुष्पोत्पादन के अंतर्गत आकर्षक पुष्प नील कमल (वॉटर लिली), सूखे फूलों की व्यावसायिक संभावनाओं तथा सफेद और पीली ग्लैडियोलस किस्मों के उत्पादन से संबंधित लेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मशरूम की खेती से ग्रामीण युवाओं की सफलता और गुणों से भरपूर लायन्स मेन मशरूम के पोषण एवं औषधीय महत्व पर भी प्रकाश दिया गया है।
सब्जी उत्पादन के अंतर्गत मचान विधि से खेती तथा शुष्क एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों की पोषक सब्जी काचरी के उत्पादन संबंधी जानकारी प्रस्तुत की गई है। साथ ही, प्राकृतिक एंटीबायोटिक्स के पोषण एवं औषधीय महत्त्व, नीलगिरी के सफल उत्पादन, अर्धशुष्क क्षेत्रों में चंदन आधारित कृषिवानिकी और औषधीय पादप गुग्गुल के संरक्षण जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों को भी स्थान दिया गया है। पैशन फ्रूट की लाभकारी खेती से संबंधित लेख बागवानी में विविधीकरण एवं आय बढ़ाने की संभावनाओं को रेखांकित करता है।
समग्र रूप से यह अंक किसानों, बागवानों, कृषि उद्यमियों और बागवानी में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए वैज्ञानिक जानकारी का उपयोगी स्रोत है, जो उन्नत उत्पादन तकनीकों, मूल्य संवर्धन तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से बागवानी को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।